विज्ञान भैरव तंत्र - विधि 87

[ " मैं हूं . यह मेरा है . यह यह  है . हे प्रिये , ऐसे भाव में भी असीमतः उतरो . " ]

यह सूत्र कहता है : ' मैं हूं . '
इस भाव में गहरे उतरो . बस बैठे हुए इस भाव में गहरे उतरो कि मैं मौजूद हूं , मैं हूं . इसे अनुभव करो ; इस पर विचार मत करो . तुम अपने मन में कह सकते हो कि मैं हूं ; लेकिन कहते ही वह व्यर्थ हो गया . तुम्हारा सिर सब गुड़गोबर कर देता है . सिर में मत दोहराओ कि मैं जीता हूं , मैं हूं . कहना व्यर्थ है ; कहना दो कौड़ी का है . तुम बात ही चूक गए . इसे अपने प्राणों में अनुभव करो . केवल सिर में नहीं , इसे समग्र इकाई की भांति अनुभव करो . बस अनुभव करो : ' मैं हूं .' मैं हूं , इन शब्दों का उपयोग मत करो . यह बात सतत स्मरण रखनी है कि इसे विचार नहीं बना लेना है . इसे अनुभव करो , हृदय से अनुभव करो कि यह मेरा है , यह अस्तित्व मेरा है . और तब तुम कृतज्ञता अनुभव करोगे , तब तुम अहोभाव से भर जाओगे

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