विज्ञान भैरव तंत्र - विधि 30

[" आंखें बंद करके अपने अंतरस्थ अस्तित्व को विस्तार से देखो ."]

इसमें अभ्यास की जरूरत पड़ेगी-- एक लंबे अभ्यास की जरूरत पड़ेगी . यह अचानक संभव नहीं है ;एक लंबे प्रशिक्षण की जरूरत है . आंखें बंद कर लो . जब भी तुम्हें लगे कि यह आसानी से किया जा सकता है और जब भी तुम्हें समय हो तब आंखें बंद कर लो और आँखों की सभी भीतरी हलन-चलन को भी बंद कर दो . किसी तरह की भी गति मत होने दो . आँखों की सारी गतियां बंद हो जानी चाहिए . भाव करो कि आंखें पत्थर हो गई हैं , और तब आँखों की पथराई अवस्था में ठहरे रहो . कुछ भी मत करो ; मात्र स्थित रहो . तब किसी दिन अचानक तुम्हें यह बोध होगा कि तुम अपने भीतर देख रहे हो . इसका अभ्यास करते हुए किसी दिन अचानक , हठात तुम अपने अंदर देखने में समर्थ हो जाओगे . वे आंखें जो सतत बाहर देखने की आदी थीं भीतर को मुड़ जाएंगी और तुम्हें अपने अंतरस्थ की एक झलक मिल जायेगी . और तब कोई कठिनाई नहीं रहेगी . एक बार तुम्हें अंतरस्थ की झलक मिल गई तो तुम जानते हो कि क्या किया जाए और कैसे गति की जाए . पहली झलक ही कठिन है . उसके बाद तुम्हें तरकीब हाथ लग गई .

Page - प्रस्तावना 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25
26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 44 45 46 47 48 49 50
51 52 53 54 55 56 57 58 59 60 61 62 63 64 65 66 67 68 69 70 71 72 73 74 75
76 77 78 79 80 81 82 83 84 85 86 87 88 89 90 91 92 93 94 95 96 97 98 99 100
101 102 103 104 105 106 107 108 109 110 111 112