विज्ञान भैरव तंत्र - विधि 17

(" मन को भूलकर मध्य में रहो -- जब तक.")

इसे प्रयोग में लाओ यह सूत्र तुम्हारे पूरे जीवन के लिए है . ऐसा नहीं है कि उसका अभ्यास यदा-कदा कर लिया और बात खत्म हो गई . तुम्हें निरंतर इसका बोध रखना होगा , होश रखना होगा . काम करते हुए , चलते हुए भोजन करते हुए , संबंधों में , सर्वत्र मध्य में रहो . प्रयोग करके देखो और तुम देखोगे कि एक मौन , एक शान्ति तुम्हें घेरने लगी है और तुम्हारे भीतर एक शांत केन्द्र निर्मित हो रहा है . अगर ठीक मध्य में होने में सफल न हो सको तो भी मध्य में होने की कोशिश करो . धीरे-धीरे तुम्हें मध्य की अनुभूति होने लगेगी . जो भी हो , घृणा या प्रेम , क्रोध या पश्चाताप , सदा ध्रुवीय विपरीतताओं को ध्यान में रखो और उनके बीच में रहो . और देर-अबेर तुम मध्य को पा लोगे . और एक बार तुमने इसे जान लिया तो फिर तुम उसे नहीं भूलोगे . क्योंकि मध्य बिंदु मन के पार है . और वह मध्य बिंदु आध्यात्म का सार-सूत्र है .

Page - प्रस्तावना 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25
26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 44 45 46 47 48 49 50
51 52 53 54 55 56 57 58 59 60 61 62 63 64 65 66 67 68 69 70 71 72 73 74 75
76 77 78 79 80 81 82 83 84 85 86 87 88 89 90 91 92 93 94 95 96 97 98 99 100
101 102 103 104 105 106 107 108 109 110 111 112