क्या शराब पीना पाप है ? जानते है क्यों ? Is it a sin to drink alcohol?


          शराब पीना पाप है की नहीं , ये मै नहीं कह सकता ,लेकिन दुनिया के सारे धर्म एक सुर में इसका विरोध करते हैं ,मैं ये नहीं कहता की मैंने शराब नहीं पी , मैंने पी , और तब ये जाना है की इसे क्यों नहीं पिया जाना चाहिए , धर्म झूठ नहीं बोलते , वो सतही बात नहीं करते ,वो जो बताते हैं वो वास्तव में बड़ी गहरी बात है , एक तो इंसान पहले ही बेहोश है उस पर शराब पी ले तो दुगनी बेहोशी ,ये बेहोशी ही कम खतरनाक नहीं है तो दुगनी बेहोशी का क्या कहियेगा ? एक तो पाप उस पर महापाप .बेहोशी में लिए गए निर्णय गलत होते हैं , उस पर दुगनी बेहोशी तो नर्क में ही डाल दे. 
        बुध, महावीर , जीसूस, मोहमद , नानक ,कबीर सब के सब शराब को बुरा बता रहे है , क्यों? इस लिए नहीं  की शराब पीने से आपका लीवर खराब हो जायेगा , और उन्हें आप के लीवर की बड़ी फिकर है ,  उन्हें आपके लीवर की नहीं आपकी आत्मा की फिकर है , शराब आपको बेहोशी में ले जायेगी, आप पहले ही बेहोशी में हो , उस पर शाब पी ली तो मानों होश में आने की जो एक आध् आशा भी है वो भी जाती रहेगी.
       दुनिया के सारे धर्म आप से उस परम होश को पाने की आशा रखते हैं जिसे बुध , महावीर , जीसूस , मोहमद , नानक , कबीर ने पाया था. शराब पी  कर आप और भी गहरी बेहोशी में चले जाते हैं , तब आप मुक्त नहीं हो सकते , जिस मुक्ति की बात दुनिया के सारे धर्म करते हैं , फिर धर्म भला कैसे आप के शराब पीने का समर्थन कर सकते है?
       दुनिया में सबसे बड़ा कोई पाप है तो  वो है बेहोशी , उससे बड़ा पाप नहीं , क्यों की सारे पापों की जड़ बेहोशी में छुपी है , होश में पाप संभव ही नहीं , दुनिया में सबसे बड़ा पुण्य है तो वो है परम होश , क्यों की होश साधा नहीं की पाप किया जाना असंभव हो जाता है , ये जगत ही खेल हो जाता है , और प्रेम आनंद का ऐसा झरण फूटता है की उसकी अविरल धारा में प्राणी हमेशा नहाया रहता है 

* ओशो सौरव *

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