सिद्धार्थ उपनिषद Page 178


(480)
नाद गाड़ी है, संयम (धारणा, ध्यान, समाधी, होश, सुरति, सुमिरन) मार्ग है, गुरु द्वारा निर्धारित कार्यक्रम (ओशोधारा में २८ संबोधि कार्यक्रम) मील के पत्थर हैं, चेतन आकाश मंजिल है और आनंद साध्य है.
         
(481)
विपस्सना का अर्थ है भीतर देखना, भीतर के प्रति जागना. पतंजलि जिसे प्रत्याहार कहते हैं, उसी को बुद्ध विपस्सना कह रहे हैं. विपस्सना ३ प्रकार का होता है- अनापानसती योग, विचारसती योग और भावसती योग.
अनापानसती योग में सांस के प्रति, विचारसती योग में विचार के प्रति और भावसती योग में भाव के प्रति जागना होता है.
           
(482)
मन के द्वारा मंत्र दोहराना जाप है. सांस के द्वारा मंत्र दोहराना अजपा है.
अजपा ४ प्रकार का है.
१. सांस की आवाज "सोऽहं" अथवा "ओम् हूं" के रूप में सुनना .
२. सांस के द्वारा मंत्र जाप; उदाहरण के लिए श्वास  अर्थात भीतर आती सांस के द्वारा "ओम्" और प्रश्वास के साथ "हूं" का जाप.
३. नाद श्रवण करते हुए सांसों के द्वारा मंत्र जाप; उदाहरण के लिए नाद सुनते हुए श्वास के  द्वारा "ओम्" और नाद सुनते  हुए प्रश्वास के द्वारा "हूं" का जाप.
४. दाहिने कान से नाद श्रवण करते हुए सांसों के द्वारा मंत्र जाप; उदाहरण के लिए दाहिने कान से नाद सुनते हुए श्वास द्वारा "ओम्" और दाहिने कान से नाद सुनते हुए प्रश्वास के द्वारा "हूं" का जाप.

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