सिद्धार्थ उपनिषद Page 170


(459)

ध्यान क्या है ? निराकार को जानना और उससे तादात्मय बनाना ध्यान है. सुरति क्या है?  नादमय निराकार कि जानना और उससे तादात्म्य बनाना सुरति है.                      निरति क्या है? नूरमय निराकार को जानना और उससे तादात्म्य बनाना निरति है.
अमृत क्या है? शाश्वत निराकार को जानना और उससे तादात्म्य बनाना अमृत है.

               (460)
साक्षी क्या है? स्वधर्म के साथ वर्तमान का स्वीकार साक्षी है.
तथाता क्या है? किसी घटना के सत्य क ग्रहण कर अतीत का स्वीकार तथाता है.
समर्पण क्या है? परमात्मा को मंगलमय जानते हुए भविष्य का स्वीकार समर्पण है.

               (461)
सार क्या है? आत्मज्ञान, ब्रह्मज्ञान, शब्दज्ञान. शब्द अर्थात ओंकार, दिव्य ध्वनि, दिव्य नाद, अनहद नाद, अनाहत नाद, प्रणव, उदगीथ. भगवन महावीर जिसे अपूर्वश्रुत कहते हैं. भगवन बुद्ध जिसे ओम कहते हैं. मोहम्मद साहब जिसे सदा-ए-आसमानी  या बांग-ए-आसमानी कहते हैं. जीसस जिसे वर्ड या लोगोस कहते हैं. कबीर जिसे नाम, राम या राम नाम कहते हैं. गुरुनानक जिसे सतनाम कहते हैं.
असार क्या है? आत्मज्ञान के अतिरिक्त शेष सब असार है.

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